मणिपुर हिंसा पर हंगामे के आसार, सरकार दिल्ली अध्यादेश सहित 31 बिल पेश करेगी | Parliament Bills LIVE Update; Narendra Modi Rahul Gandhi | Arvind Kejriwal Mallikarjun Kharge


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नई दिल्ली5 घंटे पहले

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संसद का मानसून सेशन आज से शुरू हो रहा है। यह 11 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान 17 बैठकें होंगी। केंद्र सरकार मानसून सत्र में 31 बिल ला रही है। जिसमें 21 नए बिल हैं वहीं 10 बिल पहले संसद में पेश हो चुके। उन पर चर्चा होगी। सबसे ज्यादा चर्चित बिल दिल्ली में अफसरों के ट्रांसफर-पोस्टिंग से जुड़ा अध्यादेश है।

सत्र शुरु होने से पहले 19 जुलाई को सर्वदलीय बैठक बुलाई गई। सूत्रों के मुताबिक, विपक्ष की मांग पर केंद्र सरकार मणिपुर हिंसा पर चर्चा करने को तैयार हो गई है। इस बैठक से एक दिन पहले सभी विपक्षी दलों ने बेंगलुरु में हुई मीटिंग में I.N.D.I.A नाम से नए गठबंधन का ऐलान किया। इसमें 26 दल शामिल हैं।

विपक्षी दलों का नया गठबंधन मानसून सेशन में मणिपुर हिंसा, दिल्ली अध्यादेश, राहुल गांधी की सदस्यता रद्द करने जैसे मुद्दों पर केंद्र को घेरने की कोशिश करेगा। इसके अलावा यूनिफॉर्म सिविल कोड और अडानी-हिंडनबर्ग मामले में JPC से जांच की मांग जैसे मुद्दों पर भी बहस हो सकती है।

तीन चर्चित बिल जो इस सेशन में पेश होने हैं…

1. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) अध्यादेश, 2023
केंद्र सरकार ने 19 मई को दिल्ली में अफसरों के ट्रांसफर, पोस्टिंग और विजिलेंस से जुड़े अधिकारों को लेकर एक अध्यादेश जारी किया था। इसके जरिए केंद्र सरकार नेशनल कैपिटल सिविल सर्विसेज अथॉरिटी का गठन करेगी। इस अथॉरिटी में दिल्ली CM, मुख्य सचिव और प्रधान गृह सचिव होंगे।

विपक्ष का रुख: दिल्ली को लेकर केंद्र के अध्यादेश के खिलाफ विपक्ष एकजुट हो गया है। कांग्रेस ने 16 जुलाई को AAP को समर्थन देने की बात कही। वहीं केजरीवाल को बंगाल सीएम ममता बनर्जी, शरद पवार, केसीआर और उद्वव ठाकरे का साथ पहले ही मिल चुका है। 18 जुलाई को बेंगलुरु में 26 पार्टियों की विपक्षी एकता बैठक भी हुई थी।

मायने: अध्यादेश के मुताबिक, दिल्ली में अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग का आखिरी फैसला उपराज्यपाल यानी LG का होगा। इसमें मुख्यमंत्री का कोई अधिकार नहीं होगा।

2. डिजिटल पसर्नल डेटा प्रोटेक्शन बिल, 2023
इस बार के मानसून सेशन में डिजिटल पसर्नल डेटा प्रोटेक्शन बिल, 2023 भी पेश किया जाएगा। हालांकि इससे पहले अगस्त 2022 में पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल तैयार किया गया था लेकिन IT मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव द्वारा वापस ले लिया गया था। आईटी मंत्रालय ने बिल को नए सिरे से तैयार किया, इस बार उसे डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) बिल नाम दिया।

विपक्ष का रुख: इस साल 12 जून को कोविन एप पर डेटा लीक की खबर आई थी। जिसको लेकर विपक्षी नेताओं ने काफी हंगामा किया था। हालांकि सरकार ने डेटा लीक के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। डिजिटल पसर्नल डेटा प्रोटेक्शन बिल पर विपक्ष का रुख क्या रहता है, यह सदन की कार्यवाही के दौरान पता चलेगा।

मायने: इस बिल के तहत टेलिकॉम कंपनियों से लेकर सोशल मीडिया व अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म कंपनियों पर यूजर का डेटा लीक करना प्रतिबंधित हो जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने पर 250 करोड़ रुपए तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान है। इसका मकसद देश के नागरिकों की निजी डेटा की सुरक्षा करना है।

3. जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2023
मानसून सत्र में एक और बिल पास किया जाने वाला है। इसका नाम जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2023 है। 13 जुलाई को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस बिल को मंजूरी भी दे दी गई।22 दिसंबर 2022 को ये बिल लोकसभा में इंट्रोड्यूस किया गया था, अभी पास होना बाकी है।

विपक्ष का रुख: विपक्ष की तरफ से अभी जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2023 पर कुछ टिप्पणी नहीं की गई है।

मायने: सिटिजन्स के डेली रूटीन को आसान बनाने के लिए 42 अधिनियमों के 183 प्रावधानों को या तो खत्म कर दिया जाएगा या उनमें संशोधन कर छोटी-मोटी गड़बड़ियों को अपराध की कैटेगरी से हटा दिया जाएगा। इनमें जेल की सजा से जुड़े कई प्रावधान शामिल हैं। इन संशोधनों को लागू किए जाने से मुकदमों का बोझ घटेगा।

अब जानिए वो 10 बिल जो पहले पेश हो चुके, मानसून सेशन में चर्चा होगी
बायोलॉजिकल डाइवर्सिटी (संसोधन) बिल 2022, जन विश्वास (संसोधन) बिल-2023, मल्टी स्टेट कॉपरेटिव सोसाइटीज (संसोधन) बिल 2022, डीएनए टेक्नोलॉजी रेगुलेशन बिल 2019, रिपीलिंग एंड एमेंडमेंट बिल 2022, फॉरेस्ट कंजर्वेशन एमेंडमेंट बिल, 2023, मीडिएशन बिल 2021, सिनेमेटोग्रॉफ संसोधन बिल 2019, संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश (तीसरा संशोधन) बिल 2022, संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश (चौथा संशोधन) बिल 2022

21 बिल जो इस सेशन में पेश किए जाएंगे…

विपक्ष के वो 4 मुद्दे जिन पर सरकार को घेरने की तैयारी…

1. दिल्ली पर केंद्र सरकार का अध्यादेश
दिल्ली पर केंद्र सरकार के अध्यादेश के खिलाफ दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल के साथ पूरा विपक्ष लामबंद हो गया है। केजरीवाल का कहना है, दिल्ली का अध्यादेश एक प्रयोग है। बाद में इसे बाकी राज्यों में लागू किया जाएगा। वह दिन दूर नहीं, जब पीएम 33 राज्यपालों और एलजी के माध्यम से सभी राज्य सरकारें चलाएंगे। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे इसे लोकतंत्र पर हमला बता चुके हैं। ऐसे में सभी विपक्षी दल एक सुर में इस अध्यादेश का विरोध करेंगे।​

2. मणिपुर हिंसा पर सवाल
मणिपुर में 3 मई से कुकी और मैतेई समुदाय के बीच आरक्षण को लेकर हिंसक झड़प हो रही है। 77 दिन से जारी हिंसा पर कांग्रेस काफी समय से सरकार को घेरने में लगी है। जयराम रमेश ने 14 जुलाई तो राहुल गांधी ने 15 जुलाई को पीएम की चुप्पी पर निशाना साधा था।

इससे साफ जाहिर है कि विपक्ष मानसून सेशन में केंद्र सरकार को इस मुद्दे पर जरूर घेरेगा। गृहमंत्री अमित शाह ने 29 मई को मणिपुर का तीन दिन का दौरा किया था। वहीं राहुल 29 जून को दो दिन के लिए मणिपुर गए थे। हिंसा में अब तक 150 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

3. यूनिफॉर्म सिविल कोड पर हंगामा
केंद्र ने मानसून सेशन में लाए जा रहे अपने 31 विधेयकों में भले ही यूनिफॉर्म सिविल कोड को शामिल नहीं किया हो। मगर यह चर्चा का विषय जरूर है। नरेंद्र मोदी ने 27 जून को मध्य प्रदेश में एक जनसभा के दौरान यूनिफॉर्म सिविल कोड का मुद्दा उठाया था। पीएम ने कहा था कि एक घर में दो कानून नहीं चल सकते। जिसके बाद से विपक्ष के लिए यह बड़ा मुद्दा बना हुआ है।

4. राहुल गांधी की सांसदी जाने का मुद्दा
मोदी सरनेम केस में 24 मार्च को राहुल की सांसदी चली गई थी। ऐसे में वह संसद सदस्य नहीं होने के कारण मानसून सत्र में बैठ नहीं पाएंगे। पिछले बजट सेशन के बीच में राहुल की सदस्यता गई थी जिसको लेकर कांग्रेस ने सदन में काफी हंगामा किया था।

हाल ही में 7 जुलाई को गुजरात हाई कोर्ट ने भी राहुल की सजा कम करने से इनकार कर दिया। इस पर सुप्रीम कोर्ट में 21 जुलाई को सुनवाई होनी है। ऐसे में कांग्रेस मानसून सेशन में इसको बहस का मुद्दा बनाएगी।

पांच राज्यों में चुनाव से पहले संसद में हंगामे के आसार
संसद का इस बार का मानसून सत्र काफी अहम है। अगले कुछ महीनों में देश के पांच राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल इस साल दिसंबर और अगले साल जनवरी में खत्म हो जाएगा। ऐसे में सत्ताधारी पार्टी और विपक्षी दल दोनों आगामी चुनावों का बिगुल संसद में बहस के साथ फूंक देंगे।

पहली लोकसभा से लेकर 17वीं लोकसभा तक कितने बिल पास हुए….

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